Monday, 17 October 2016

मुहर्रम और दशहरे में भाई-चारा

ACनवरात्र,ये शब्lcद सुनते ही जैसे दिम s4
6soाcxscग में एnकx ही ख्याल आता है दशहरा 4में ज लता हुआx and  c s1रावण ,मेला और पटाकों की आति  शबाज़ी। 6के
और मुहर्रम इसे सुनते ही बाबा जी की सवारी,मेला और खूबसूरत-ख़ूबसूरत ताजिया।
यूँ तc xcsc ो नवरात्र हिंदुओं का प्रमुख त्यौहार है लेकिन इस त्यौहार का आनंद सभी लेते हैं नवरात्र में नौ दिन cअलग-अलग देवियों की पूजा की जाती है लेकिन इन नौ दिनों के बाद आता है दश  हरा जिसके कारण लोगो में काफी उत्साह होता है।लेकिन ये बरस उमरिया के लोगों के लिए काफी रोमlलोलीांचित था क्योंकि इस बार ckaदशहरा के दिन ही मुहर्रccम की नौंवी रात यानी कत्ल की रात थी 2और उमरिया जिले का मुहर्रम पूरे मध्यप्रदेश में काफी चर्चित है क्योंकि उमरिया में ये मान्यता है कि सवारी के लिए बाबा किसी मुस्लिम को कभी भी नहीं आएंगे और यहाँ के मुहर्रम में लोगो की मुरादें भी पूरी होती हैं और शायद यही वजह है कि यहाँ के लोग मुहर्रम को काफ़ी ज़ोरो-शोरो से मनाते हैं।इन दोनों त्योहारों का लोगो में एक अलग ही उत्साह होता है लेकिन मेरे सामने ये पहली बार था जब ये दोनों त्यौहार साथ में हैं,लोगों को तो मैंने यह तक अटकले लगाते सुना था कि इस बार जिले में हिन्दू-मुस्लिम विवाद जोरो से होगा लेकिन भला हो नगर-वासियों की आस्था का और उनकी बुद्धिमत्ता का जो उन्होंने इन दोनों पावन अवसरों को इतनी शान्ति,ख़ुशी और भाईचारे के साथ मनाया और बिना किसी विवाद के इन दोनों त्योहारों को गरिमामयी तरीके से मनाया की मुझे भी उमरिया-वासी होने का गर्व महसूस होने लगा है।